अमावस की रात -अर्थात अँधेरा -इसी अँधेरे में छुपी हुई है -एक आशा- प्रकाश की किरण जो तुम्हारे अंदर भी है -बस इसे ही विस्वास के साथ बिकसित करो और द्वितीया ,तृतीया,चतुर्थी की तरह आगे बढ़ाते हुए पूर्णिमा अर्थात पूर्णतः को प्राप्त करो I --तात्या साई बाबा --साई मंदिर -तातियागंज,कानपुर , उ ० प्र ० , भारत TATYASAI.COM
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