| Puja for Wealth |
| Written by Administrator |
| Tuesday, 14 June 2011 22:32 |
22 वर्षो के लिए साईं बाबा तात्या साईं मंन्दिर तातियागंज में आ गये है -बाबा इस मंन्दिर के माध्यम से अब तक हजारों भक्तों की मनोकामनाए पूर्ण कर चुके है ा
मन्दिर पहुचने के लिए- भारत की राजधानी नई दिल्ली में रेल या वायुयान द्वारा कानपुर पहुचे (420किमी0), कानपुर से 20किमी0 पष्चिम में तात्यार्साइं मन्दिर
तातियागंज ( रामा मेडिकल कालेज से 3 किमी0 पष्चिम में जी0 टी0 रोड पर है।) टेम्पो,विक्रम, आटो, बस या कार द्वारा पहुचे। ठहरने के लिए कानपुर सिटी में होटल
500 से 10,000 तथा धर्मषाला 200 से 400 रु0 में उपलब्ध हंै।
Mata Maha Lakshmi is the Goddess of wealth and prosperity, both material and spiritual. The word ''Lakshmi'' is derived from the Sanskrit word Lakshmi, meaning "goal." Laxmi, therefore, represents the goal of life, which includes worldly as well as spiritual prosperity. In Hindu mythology, Goddess Mata Luxmi, also called Shree, is the divine spouse of Lord Vishnu and the Goddess of wealth and fortune. You must perform this Puja for wealth, when you are facing financial difficulties and wish to earn wealth .For improvement in Financials and also for recovery of dues, which are said to bestow different benefits to the performer of this Puja. Even the mere recitation of these mantras, bestow prosperity. Those who are doing business or are facing financial problems may perform this puja for wealth and prosperity to receive the blessings and grace of Goddess Lakshmee.
बाबा का चमत्कारी पेड
- सांई मन्दिर तातियागंज में बाबा का एक चमत्कारी पेड़ है। जिसकी ग्यारह बार (ग्यारह गुरूवार) परिक्रमा करने से मनोकमानायें पूर्ण हो रही है। बलाय-बाधा ठीक हो
रही हैं। परिवारिक कष्ट ठीक हो रहे हैं। पति-पत्नी की अनबन ठीक हो रही है। भक्तों को सर्विस मिल रही है। सन्तान व शादी का योग बन रहा है और यह सब केवल सांई बाबा की कृपा ही है जो भक्तों को लाभ मिल रहा है क्यों कि यहाँ पर पहले जामुन का पेड़ था और बाबा सपना देकर यहाँ आये और धीरे-धीरे जामुन का पेड़ पीपल के पेड़ में बदल गया। और इसी के साथ 10 फीट की दूरी पर नीम का पेड़ निकला (लगाया नहीं गया है) वह पेड़ भी साथ-साथ विकसित हो रहा है। इसी पेड़ की परिक्रमा से भी लाभ मिल रहा है। दो में से किसी एक पेड़ की परिक्रमा कर लें।
ः- क्यों कि पवित्र पेड़ों के केन्द्र में ऊर्जा होती है अदृश्य रुप में दैवीय शक्तियां होती है, केन्द्र में कृपा बरसती है। जिसका प्रभाव भक्त के मन मस्तिषक पर पड़ता है। और उसे दैवीय कृपा मिलनी शुरू हो जाती है।
साईं मन्दिर तातियागंज में हर गुरुवार फूलो से बाबा का एवं सभी देवी देवताओ का हवन पूजन किया जाता है । बाद में यही फूल भक्तो में प्रसाद के रुप में बाॅट दिये जाते है । बाबा के इन फूलो को अपने घर में पूजा के स्थान पर ड्राईंग रुम में, स्टडी रुम म,ें रसोई घर में, दरवाजे पर तथा आमदानी के स्थान पर रख दें ।जिस घर बाबा के फूल पहुँच जाते है । सभी अदृश्य नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती है टोना , बलाय-बाधा , नजर दोष , वास्त्र दोष सभी ठीक हो जाते है ।रुके हुए काम बनने लगते है । शादी विवाह की अर्चन दूर हो जाती है , रोजी रोजगार के अवसर खुल जाते है । और हर प्रकार से बाबा की कृपा से पारवारिक शान्ति मिलती है तथा जीवन में विकास होना शुरु हो जाता है । अतः जब भी मन्दिर आयें । पूजा के कार्यक्रम में शामिल होकर बाबा के फूल अवश्य ले जायें ।ये पूजा कार्यक्रम हर गुरुवार दोपहर -1 बजे से 4-बजे के बीच सम्पन्न होता है ।
ः- बाबा का प्रसाद ग्रहण करने से अनेकों समस्याओ का समाधान होना शुरु हो जाता है अदृश्य-दुष्ट शक्तियां ( बलाय-बाधा) सब दूर हो जाती हैं। ग्रहों का दोष मिटने लगता है। आत्मबल बढ़ता है। शारीरिक शक्तिबढ़ती है, विश्वास बढ़ता है और परमात्मा का सद्गुरु का आशीर्वाद भलीभूत होने लगता है। अतः बाबा का प्रसाद जरुर लेना चाहिए। बाबा के मन्दिर में जो प्रसाद भक्तगण बाबा को अर्पित करते हैं उसी प्रसाद को बाबा भोगलगाकर पवित्र बना देते हैं। फिर वही प्रसाद भक्तगण अपने घर ले जाते हैं। आप यदि चाहते हो कि हम बाबा को जो प्रसाद चढ़ायें वह अपने घर ले जायें तो आप प्रसाद दो भाग में लायें आधा चढ़ा दें आधा अपने साथ लेजायें। जैसे 1 किलोग्राम है तो आधा-आधा किलो के दो पैक लायें। एक पैक बाबा को चढ़ा दें एक पैक घर लेते जायें किन्तु मन्दिर से जो प्रसाद मिले उसे अपने साथ जरुर ले जायें। भले ही पांच बताशे हों यही कल्याणकरेंगे। आप जो भी प्रसाद लायें सब बाबा को अर्पण कर दें।
नारियल का चढ़ाव- आप बाबा को नारियल अर्पण करें । बाबा के इस मन्दिर में नारियल फोड़ा नहीं जाता है । आपके द्वारा चढ़ाया गया नारियल किसी दूसरे भक्त को प्रसाद के रुप में दे दिया जाता है । जो नारियल अन्य भक्त चढ़ाते है । वह बाबा जी की प्रेरणा से प्रसाद के रूप में कभी आपको भी मिल सकता है । महाराज जी को, बाबा जी, से जिस भक्त को नारियल देने की प्रेरणा मिलती है । उसी भक्त को नारियल दे दिया जाता है । प्रथम बार नारियल मिलने पर इसे अपने घर मे स्थापित करेें ,पूजा करें इसके एक साल बाद गंगाजल में या किसी पवित्र सरोवर में प्रवाहित कर दें । यदि आपको दुबारा या तिबारा नारियल ग्यारह माह के अन्दर मिल जाता है तो उसे फोड़कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और प्रसाद बाॅट दें ।
इसी प्रकार बाबा को अगरबत्ती के पैकेट अर्पण करें। अगरबत्ती का पैकेट महाराज जी द्वारा बाबा जी की प्रेरणा से भक्तों में ही बाॅट दिया जाता है । बाबा जी की अगरबत्ती जिस घर में पहुॅच जाती है। बाबा जी उस घर में अवष्य जाते है । कृपया अगरबत्ती महाराज जी से न माॅगें बाबा जी महाराज जी तुम्हे दें देगें ।
मोमबत्ती का पैकेट- बाबा की कुटिया में मोमबत्ती जलाने के लिए मोमबत्ती का पैकेट गुरूवार को ही कुटिया में बाबा जी को अर्पण कर दें ,चढ़ा दे जो बाबा की कुटिया में दीप या मामबत्ती जलाता है या जलवाता है बाबा जी उसका जीवन सदैव रौषन करते रहते है अथवा षुद्व देषी घी अपनी श्रद्वानुसार 1किलो ,2 किलो अर्पण कर सकते है। इससे दीप जलाये जाते है और षेष घी का उपयोग भण्डारे में कर दिया जाता है ।
कलावा- कलावा का अर्पण करें । कलावा के रक्षा सूत्र के छोटे छोटे पीस कर लें । एक पीस (टुकड़ा) रक्षा सूत्र अपनी मनोकाॅमना की पूर्ति के लिए अथवा समस्या के निराकरण के लिए बाबा से प्रार्थना करते हुए रक्षा स्तम्भ में बाँध दें। कोई साथ में भाई बन्धु , परिवार रिष्तेदार है । उनसे भी बॅधवा दें , षेष रक्षा सूत्र के पीस भक्तों में बाॅट दें जिस भक्त को मनोंकामना की पूर्ति के लिए बांधना होगा । बंाध देगा ।
प्रसादी भण्डारा- प्रायः हर गुरूवार भक्तो द्वारा प्रसादी भण्डारा प्रसाद के रूप में भक्तों के बीच बाॅटा जाता है ।प्रसादी भण्डारा में एक पुवा बच्चो को और दो पुवा बड़ो को दे दिया जाता है । 21 पुवा बनवाने पर लगभग 2100 रू0 खर्च आता है । आप स्वयं 21 किलो या 51 किलो पुवा बनाकर अथवा मन्दिर में ही बनवाकर बटवा सकते है । यदि आप 21या 51 किलो पुवा नहीं बटवा सकते है तो मंदिर में पुवा बाॅटने में सहयोग राषि के रूप में 21,51,101,या501 अर्पण कर सकते है । अथवा 5 या 10 किलो के आॅटे के पैकेट अर्पण कर सकते है ।
वस्त्र या वस्तु का प्रसाद- आप बाबा के मन्दिर में पेन, कापी, बिस्कुट के पैकेट, बनियान ,ब्लाउज -पीस ,धोती , सूटर , कम्बल आदि अर्पण कर सकते है । जो प्रसाद के रूप में भक्तों में बाॅट दिया जाता है ।
चादर- आप बाबा को चादर चढ़ा सकते हो आप के द्वारा चढ़ार्द गयी चादर दूसरे या तीसरे गुरूवार को किसी न किसी भक्त को (जिसे बाबा संदेष देते है) बाॅट दिया जाता है । चादर का कोई मूल्य आदि नहीं लिया जाता है ।
धन- मन्दिर में किसी भक्त से पूजा पाठ के नाम पर कुछ भी नहीं लिया जाता है । जो भक्त श्रद्वा भाव से जो बाबा को धन अर्पण करते है , उस धन से मन्दिर निर्माण , गरीबो की सहायता खजाने का वितरण , वस्तु या वस्त्र का वितरण भण्डारे का आयोजन तथा साई मिषन के अन्य सेवा प्रकल्पो में खर्च किया जाता है । आप के धन का उपयोग धर्माथ कार्य में ही होता है । आपके धन का उपयोग किसी कर्मचारी या व्यवस्थापक द्वारा निजी कार्यों में नहीं होता है ।
बाबा के चरणामृत में:- ताबें के छोटे से पात्र में चुम्बकीय जल ले लें। उसी में एक बताशा, एक तुलसी की पत्ती, गुलाब के फूल की 2-3 पंखुड़ी और थोड़ा सा कपूर डाल दें। बाबा का चरणामृत-अमृत है व्याख्या से रहित है। सब ठीक कर देगा। आपके सन्तोष के लिए चरणामृत में निम्न गुण हैं:- ताबें से कैन्सर का मर्ज नहीं होता है कई बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। चुम्बकीय जल से शरीर की 90 प्रतिशत बीमारियां ठीक हो जाती हैं। तुलसी से कुष्ट खासी, टीवी आदि रोग नहीं होते हैं। बताशा मिठास देता है, ताकत देता है। कपूर पेट के रोग ठीक करता है। पेट के कीड़े मारता है कालरा के कीटाणु मारता हैं और उपरी बलाय बाधा को दूर करता है। मन्दिर से चुम्बकीय जल ले जाने में कठिनाई हो तो एक चुम्बक का टुकड़ा मन्दिर में ले आयें महाराज जी से स्पर्श करा दें या बाबा जी के पास रख दें। फिर घर में चुम्बकीय जल बना लें। चुम्बकीय जल कैसे बनाया जाता है ? महाराज जी प्रवचन में बता देते हैं।
महाराज जी से मिलने का समय- महाराज जी केवल गुरूवार को ही दोपहर बाद 2 घण्टे सामूहिक रूप से भक्तो के बीच साईं मन्दिर तातियागंज में मिलते है । महाराज जी से अलग से मिलने का समय नहीं है ।
बाबा का चमत्कारी सिक्का:-
जो भक्त बाबा के मन्दिर में रुपया चढ़ाते हैं। वह धन बाबा का होता है और इसी धन को प्रसाद स्वरुप बाबा के खजाने के रुप में हर भक्त को हर माह के अन्तिम गुरुवार
को बांटा जाता है। जिस घर में बाबा का सिक्का जाता है। उस माह/उस वर्ष भक्त के घर में धनधान्य की कमी नहीं रहती है। डा0 श्रीमती के0के0 बाजपेई पोखरपुर, कानपुर ने बताया कि जब वह पहली बार सिक्का ले गईं थी तब वह खो गया था। दूसरी बार बाबा के खजाने का जबसे सिक्का ले गयीं हैं। बाबा की कृपा से धन का आगमन बड़े ही अच्छे ढंग से हो रहा है। इसी तरह एल.आई सी. अधिकारी श्रीकृष्ण चन्द्र अग्निहोत्री, फूलबाग, कानपुर तथा श्री शैलेन्द्र तिवारी एडवोकेट कानपुर
कोर्ट कम्पाण्ड कानपुर ने बताया कि उन्हें बाबा का सिक्का प्राप्त करने से अच्छा लाभ मिल रहा है। श्री एडवोकेट महोदय को बाबा की सुगन्ध भी मिल चुकी है। अतः अन्तिम गुरुवार को आना न भूलें।
ः- प्रायः हर माह के अन्तिम गुरुवार को बाबा के प्रसाद के रुप में कुछ न कुछ वस्तुयें भक्तों में बांट दी जाती हैं। यह वस्तुयें प्रायः भक्त लोग ही बांटते हैं।
अथवा भक्तलोग बाबा के मन्दिर में अर्पण करते हैं या महाराज जी को दे देते हैं। महाराज जी ने इन्हें अपनी व्यवस्थानुसार भक्तों में बंटवा देते हैं।
ः- बाबा की कृपा पूजा पाठ के नाम किसी से कुछ नहीं लिया जाता है। बाबा सबकी मनोकामनायें पूर्ण कर रहे हैं। बाबा अपने भक्तों के बच्चों के विचारों में बदलाव लाकर उन्हें पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ने को प्रेरित करतेहैं। बाबा की कृपा होने से बलायें बाधा ठीक हो रही हैं। नवग्रह की पीड़ाओं का समन हो रहा है। भक्तों के घर में सुख शान्ति आ रही है। पारिवारिक अनबन ग्रह-क्लेश कलह सब ठीक हो रहे हैं। आकस्मिक दुर्घटनाओं सेबाबा सबकी रक्षा कर रहे हैं। अविवाहित भक्तों के लिए सही जीवन साथी का चुनाव बाबा स्वयं कर रहे हैं। बेरोजगारों को रोजगार की व्यवस्थायें कर रहे हैं और यह सब सांई मन्दिर तातियागंज में बाबा की कृपा केवलबाकी की कृपा से हो रहा है। अतः कम से कम 11 बार मन्दिर में आकर बाबा की पूजा प्रार्थना में जरुर-जरुर शामिल हों। बाबा आपकी रक्षा करेंगे। आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।
ः- महाराज जी के संक्षिप्त मधुर प्रवचन मुख्य रुप से बिन्दुओं पर ही केन्द्रित होते हैं।
अपने को संवारों, पढ़ो लिखो आगे बढ़ो सत्कर्म से धन कमाओ चरित्रवान बनों कर्मठ बनो कर्मशील बनों अपने लक्ष्य को पाने के लिए सच्चाई लगन के साथ सतत् प्रयत्नशील रहो। जीवन में यथा सम्भव सत्य कोअपनाओ। क्यों कि सत्य में ही ईश्वर है। सबसे प्रेम करो। दूसरो का हक मारने कीकभी न सोचो।अपने परिवार को देखो परिवार के सदस्यों का सम्मान करो। छोटे को प्यार करो सबको शिक्षा दो, सबको सही मार्गदर्शन दो,परिवार में सभी को प्यार दो और अपने परिवार में प्रेमपूर्व माहौल बनाओ। सबको प्रगति के रास्ते पर चलाने का प्रयास करो। पति पत्नी में प्रेम करो अन बन न हो। भाई-भाई से प्रेम करो एकता के साथ आगे बढ़ो। औरसमाज के साथ चलने का प्रयास करो। निरन्तर प्रभू का स्मरण करो, सत्संग करो अच्छे विचार बनाओ। दुर्गुणों से दूर रहो, दुर्गुण है तो छोड़ो प्रभू के गुण गाओ, प्रभू के कार्य करो, जीवन को धन्य बनाओ। और हर हाल मेंसुखी रहने का प्रयास करो, पुरुषार्थ करो। सब में ईश्वर का रुप देखो।
सब कुछ निषुल्क-
ः- तात्या सांई महाराज जीके अनुसार- बाबा के इस मन्दिर में पूजा पाठ तन्त्र मन्त्र आदि के नाम पर किसी भक्त से कुछ भी नहीं लिया जाता है। यह सब निःशुल्क है। महाराज जी को तन्त्र मन्त्र, जादू-टोना कुछ भी नहींआता है और न ही कोई किसी प्रकार की सिद्धि है जिसका महाराज जी के द्वारा दावा किया जाता हो महाराज जी के पास अगर कुछ है तो वह है सच्चाई, सत्यता, हृदय से निकली हुई सच्ची प्रार्थना। महाराज जी की सच्चीभावना जो आने वाले भक्तों के कल्याण के लिए, उनकी रक्षा के लिए, भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सच्चे मन से बाबा की प्रार्थना करते हैं। और भक्तों से प्रार्थना करवाते है। और लोगों का/भक्तों का भला करतेहै। प्रसाद चढ़ाने के लिए जो भक्त 11, 21, 51, 101 या 501 जो भी बाबा को अर्पण करते हैं सबका प्रसाद
अगले गुरूवार बाबा को अर्पण कर दिया जाता है अथवा जो भक्त मन्दिर निर्माण के लिए एक ईंट के सहयोग के लिए 51/-रु0 देते हैं ले लिया जाता है किसी भक्त को बाध्य नहीं किया जाता है और न ही कोई भक्त किसीप्रकार का कोई शुल्क देने के लिए बाध्य है। और जो भी धन भक्तों सें द्वारा महाराज जी को या बाबा के मन्दिर में अर्पण किया जाता है। उससे एक भी पैसा महाराज जी द्वारा अथवा मन्दिर के किसी कर्मचारी द्वारा निजीकार्यों में खर्च नहीं किया जाता है। सब बाबा को अर्पण है और इसके बाद भी यदि कोई भक्त बाबा को कुछ अर्पण करता है तो वह भक्तों में ही बांटा जाता है। या समाज सेवा में लगा दिया जाता है।
रक्षा कवच स्तम्भ:- रक्षा कवच स्तम्भ (झण्डा) में रक्षा कवच सूत्र बांधने से सांई भगवान सदैव आपकी रक्षा करते हैं और मनोकामना की पूर्ति करते हैं। मनोकामनायें जैसे- पढ़ाई में मन न लगना, किसी कार्य में सफलता न मिलना, मनवांछित वर-वधू की प्राप्ति (मनोनुकूल पत्नी या बहु की प्राप्ति, बेटी के वर की खोज) कष्टों से मुक्ति मुकदमा में विजय, पति-पत्नी की अनबन (ग्रह क्लेश से छुटकारा अर्थात् पति-पत्नी में प्रेम, अच्छी संतान की प्राप्ति, बीमारी से मुक्ति व्यापार में लाभ, रुके काम बनना आदि आदि। बाबा की कृपा से उपरोक्त सभी मनोकामनायें पूर्ण हो रही हैं। मनोकामना की पूर्ति के लिए रक्षा सूत्र रक्षा कवच स्तम्भ (पोल) में बांधे। इसके लिए एक कलावा का पीस ले आयें उसके 8-10 इंच के कई टुकड़े कर लें एक आप अपना स्वयं बांध दें अगर परिवार का कोई सदस्य आपके साथ है तो उसे बंधवा दें और शेष टुकड़े भक्तों के बीच में स्वयं बाट दें जिससे वह भी अपनी रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांध देंगे इसका भी आपको लाभ मिलेगा।
बाबा को अपने घर आने का निमंत्रण दें -
बाबा की तीसरी विशेषता यह है कि बाबा मन्दिर में आने वाले हर भक्त के घर जाते हैं। अतः हम सभी भक्त बाबा को अपने घर आने का निमंत्रण दें। बाबा को अपने घर के एक कोने में एक अलमारी में या एक कमरे में या पूजा केे स्थान में ही एक स्थान बना दें। एक पाटे में आसन बना दें। सफेद कपड़ा बिछा दें। आसन पर बाबा का चित्र रख दें। बाबा का चित्र न मिले तो यही पुस्तिका रख दें। प्रतिदिन सुबह शाम बाबा की आरती करें। सांई मन्दिर तातियागंज में आयें और बाबा को अपने घर बुलाने के लिए निम्न प्रार्थना करें। आओ मेरे बाबा आओ मेरे बाबा अब मेरे घर में आओ मेरे बाबा। मेरे बाबा सद्गुरु बनकर सच्ची राह दिखाओ मेरे बाबा। तुम बिन कौन सुनै मेरी बाबा। अपना शिष्य बनाओ मेरे बाबा। तुम बिन कौन हरै दुख मेरो। अब सबके दुःख दुर भगाओ मेरे बाबा। आओ मेरे बाबा आओ मेरे बाबा अब अन्र्तमन में आओ मेरे बाबा। आओ मेरे बाबा, आओ मेरे बाबा। अब मेरे घर में आओ मेरे बाबा।।
दान पात्र में धन- कोई भी धन रुपया पैसा आदि दान पात्र में ही डालें। मन्दिर में किसी भी कर्मचारी के हांथ में न दे जिससे आपके धन का सही उपयोग हो सके और अप्रत्यक्ष रुप से उसका लाभ आपको मिल सके मन्दिर में प्रत्येक कर्मचारी को मन्दिर प्रशासन से उसकेकार्य।का अलग से पारिश्रमिक दिया जाता है। महाराज जी को देना चाहें तो लिफाफे में डालकर महाराज जी को दे सकते हैं।
हर गुरूवार पूजन , पाठ, हवन में षामिल होंः- यदि आप वास्तव में परेशान हैं, घर परिवार में पारिवारिक उल्झन हैं। परिवार के सदस्यों में मन मुटाव है सब अपने अपने अहम् में जी रहे हैं। औरों के ऊपर दोषारोपण कर रहे हैं। बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है, घर का सदस्य शराब सिगरेट आदि का नशा करने लगा है। काम काज में मन नहीं लगता है। जीवन साथी नहीं मिल रहा है। योग्य लड़का (दामाद) या बहू नहीं मिल रही है। शादी का योग नहीं बन रहा है। ग्रहों की पीड़ा से परेशान है। दुकान व्यापार चल नहीं रहा है। फैक्ट्री बन्द हो रही है। काम काज सर्विस नहीं मिल रही है। सन्तान का योग नहीं बन रहा है। हो सकता है कि इनका सबका कारण दुष्ट प्रवृत्ति की अदृश्य शक्तियाँ हों। बाबा के इस मन्दिर में आये और भगवान जी की प्रार्थना में हवन पूजन आरती में शामिल हों। सांई बाबा के प्रवचन तात्या सांई महाराज के माध्यम से सुनें जीवन में उतारें और सुखी बने बाबा अपनी अदृश्य कृपा से सभी कुछ ठीक कर रहे हैं। आप भी हो सकते हैं। अतः किसी भी गुरुवार को दोपहर बाद होने वाले हवन, पूजन में शामिल हों और बाबा जी का आशीर्वाद कृपा पायें। पूजा पाठ में शामिल होने का कोई शुल्क नहीं है। पूजा का प्रसाद व फूल लेकर अपने घर जायें। सुखी रहें। यदि आपको सुगन्ध का अनुभव कम होता है:- यदि आपको सुगन्ध का अनुभव कम होता है तो 10-15 रुपये का कपूर लाकर थोड़े कपूर से बाबा जी की/ भगवान की आरती अपने घर पर ही करें। शेष कपूर वहीं पूजा स्थल पर रख दें। 3-4 दिन के अन्दर तुम्हें वहीं कपूर की महक मिलेगी। जब कपूर की महक मिले तब जो कपूर वहाँ पर रखा है उसे उठाकर सूंघे। दोनो कपूर की महक एक जैसी हो तो वह महक वहाँ रखे कपूर की है। और दोनों महक में अन्तर मिले तो एक महक बाबा जी की है। एक महक कपूर की है। बस तुरन्त बाबा जी को प्रणाम करें और अपने ऊपर बाबा की कृपा समझें।
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