आओ हंस ले - क्योंकि हसने से दर्द , गैस , ब्लडप्रेशर, जैसे अनेको बीमारिया ठीक होती है -- भगवान् सत्य नारायण की कथा प्रारंभ होती है , दुबले -पतले पंडित जी है , मंद बुद्धि , मोटा पहलवान (दुल्लू)और उसकी पत्नी कथा संतान प्राप्ति के लिए सुनना चाहते है लेकिन इसके पूर्व कभी देखा नहीं है कि कथा कैसे होती है पंडित जी ने आँगन लिपवा कर कथा प्रारंभ की पंडित जी बोले दुल्लू जैसा मै कहूँ कहते जाना और जैसा में करू और करते जाना , प०जी - लो जल आचमन करो जब यह बोले है पंडित जी , दुल्लू भी बोला लो जल ये आचमन करो। । प०जी - अरे भाई ,मै तुमसे ही कहता हूँ लो जल ये आचमन करो -जब दुल्लू ने फिर कहा अरे भाई में तुमसे ही कहता हूँ लो जल ये आचमन करो - दुबले पतले थे पंडित जी गुस्सा रोके नहीं रुका --> मारा झापड़ दाए गाल पर बोले पंडित कहाँ फसा--उसी भाव से उसे वेग से दुल्लू ने पंडित को मारा- मन में सोंच रहा था कहाँ फसा दुल्लू बैचारा ---लड़ते लड़ते दोनों आँगन छोड़ नहा पर आये - दुल्लू पंडित कथा कर रहे , पत्नी बेचारी सकु चाये - फिर पत्नी बोली - मैं नहीं जानती थी कि इतनी लम्बी होती है भगवान् कथा - वरना जैसे लीपा था आँगन , नहा लीपने में क्या था - मैं भारत की अबला नारी अगर कहीं सबला होती तो ठेल ठाल कर फिर दोनों को आँगन में कर देती --- लड़ते लड़ते 15 मिनट हो गये इसी बीच दुल्लू का पैर भगवान् के आसन से टकराया ---- लगा पैर हिला सिंघासन हिल गए अंदर से भगवान् - देख दशा दुल्लू पंडित की भगवान् हो गये अंतर्ध्यान--किसी तरह से छूटे पंडित भागे पोथी पत्रा बगल दबाये मुड मुड कर पीछे देख रहे कहीं दुल्लू फिर न आ जाये----> शेष भाग 2 दिन बाद देखे--सदा सुखी रहो बाबा की ओर से आशीर्वाद ----तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
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