Wednesday, 8 January 2014

साईं वाणी

हर मकड़ी को अपना जाला स्वंय बुनना पढ़ता है :- हर मकड़ी को अपना जाला स्वंय बुनना पढ़ता है यह पूर्णतया: सत्य है कि मकड़ी जितना बड़ा जाला बुनती है उसकी यात्रा उतनी ही लम्बी और बड़ी हो जाती है , उसका अपना फैलाव उसके आकार और व्यक्तित्व से बहुत बड़ा हो जाता है , ठीक यही नियम हर व्यक्ति पर लागू होता है , ---> व्यक्ति को अपने जीवन के विकास की धारा , विकास का क्षेत्र , जीवन की सफलता हेतु स्वयं प्रयास करना पड़ता है ---> जब तक मकड़ी सीधी चाल चलकर जाला बनाती जाती है , जाला बड़ा और बड़ा - और सबसे बड़ा बनता जाता है --->, लेकिन जैसे ही अपनी चाल उलटी करती है , अपने ही बुने हुए जाल में फँस जाती है , ठीक यही स्थिति मनुष्य की है जब तक वह सत्य आधारित कर्म पथ पर चल कर आगे बढता है , बढता जाता है , बढता ही जाता है --- , लेकिन जैसे ही असत्य, आलस्य और बेईमानी का सहारा लेना शुरू करता है , विनाश की ओर बढने लगता है , और उसका विकास रुक जाता है , अत: जीवन में सत्य पर आधारित होकर अपना कर्म निरंतर करते रहो , साथ में प्रभु को याद करते रहो , जीवन में सब कुछ मिलेगा जो कल्पना से परे होगा , कार्य क्षेत्र चाहे जो भी हो , आगे बढ़ो , विकास करो , -----> सदा सुखी रहो , ------ तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर-प्रदेश भारत

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