भगवान् किसे कहते हें :- संसार में जितने भी जीव हें , सभी में भगवान् का अंश हें और सभी भगवान् हें , भगवान् में पांच अक्षर -" भ " से भूमि , " ग " से गगन , " व " से वायु , (अ की मात्रा से )" अ " से अग्नि , "न" से नीर अर्थात जो इन पांचो तत्वों को कण्ट्रोल करे उसे भगवान् कहते हे , जो इन पांचो तत्वों को के बारे में जो बताये या व्याख्या करे उसे भगवान् कहते हें , जो पांचो तत्वों का उपयोग करे उसे भी भगवान् कहते हे किन्तु इन सबकी सीमाये अलग अलग हें -- इसे इस प्रकार से भी समझा जा सकता हे , जैसे समुद्र का पानी , समुद्र के पानी को एक ड्रम में रख दिया जाये , इसी पानी को एक बोतल में बंद करके रख दिया जाये सामान्यता द्रष्टि में तीनो पानी हे , तीनो की सीमाये अलग अलग हे , रसायन शाश्त्री केमिस्ट के द्रष्टिकोण से तीनो प्रकार के पानी में एक ही तत्व हे - २ भाग हाइड्रोजन , और 1 भाग ऑक्सीजन , इन्ही के संयोग से पानी बनता हे इसी तरह से सभी भगवान् हे , सभी में भगवान् का अंश हे , अत : परमात्मा के सभी रूपों और स्वरूपों से प्रेम करो और खुश रहो --- भगवान् आपकी सदा रक्षा करेंगे। --बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर , उत्तर - प्रदेश भारत
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