अपने में एक विशेष गुण विकसित करें :- हर व्यक्ति का एक अपना कार्यक्षत्र होता है , जैसे विद्यार्थियों का पढ़ना , व्यापरियों का व्यापार करना , मजदूरों की मजदूरी , सर्विसमैन की सर्विस , नेताओं का नेतृत्व , प्रोफेशनल का प्रोफेशन , आदि आदि। अपने कर्येक्षेत्र में सच्चाई और ईमानदारी से कार्य करते हुए अपने लक्ष्य की और निरंतर आगे बढ़ना यही तुम्हारे जीवन का लक्ष्य है , इसके अतिरिक्त अपने अंदर एक दो गुण ऐसे विकसित करो जो सामाजिक हो , उससे तुम्हे समाज में स्नेह मिलेगा , सम्मान मिलेगा , प्यार मिलेगा और स्थान या पद मिलेगा ये कार्ये है , जैसे :- कोई वाद्य यन्त्र बजाना , जैसे ढोलक , गिटार , हारमोनियम आदि , गीत गाना ,कवि होना , भजन या फ़िल्मी या स्थानीय भाषा के गीत गाना ,अच्छा मधुर बोलना , बकता होना , समाज सेवा करना , वृद्धों की सेवा, असहारों को सहारा देना , गरीबो की मदद करना , आदि आदि ऐसे ही बहुत सारे कार्ये है। कभी कभी येही कार्ये अपनी विषम परिस्थितीयो में जीने का सहारा बनते है , जैसे :- महाभारत में अर्जुन , रसोइया बने थे , कभी कभी यही गुण अनेक असीमित सफलता देता है जैसे आज के समय में राजू श्रीवास्तवा , कपिल , लल्ली , आदि आदि हास्य कलाकार इसलिय अपने कार्ये क्षेत्र से हटकर एक या दो गुण ऐसे ही विकसित करे और सुखी रहे , बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
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