भगवान् शंकर को जल क्यों चढ़ाते हें :- शंकर भगवान् के मष्तिष्क पर चन्द्रमा हे , मष्तिस्क पर सम्पूर्ण गंगा हे , (भगवान् ने केवल एक लट खोली जो अंश रूप में धरती पर विशाल गंगा के रूप में हे ) , गंगा और चंद्रमा दोनों ही शीतल हैं , फिर इन्हें भक्त के जल की क्या आवशयकता हे , जब कि शंकर भगवान् एक ही लोटा जल चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हे, भगवान् शंकर शीतल जल लेकर के भक्त को यह सन्देश देते हे कि हमको देखो ----हम मस्तक पर चंद्रमा और गंगा दोनों को धारण करके अपने मस्तक को ठंडा रखते हे , तुम भी अपने मन मस्तिष्क को ठंडा रखो इसे गर्म न रहेने दो , अगर ये गरम रहेगा तो नाना प्रकार की बीमारियाँ जन्म लेगी जैसे :- नींद न आना , ब्लडप्रेशर, टेंशन या तनाव , गुस्सा , चिडचिडा पन आदि आदि और जब ये सब हो जायेगा तो सब कुछ अव्यवस्थित हो जायेगा , जीवन का विकास रुक जायेगा अत : अच्छे विचारो से युक्त होकर मस्तिष्क को ठंडा रखो , जब मन प्रसन्न होगा और ठंडा होगा तो अच्छा सोचोगे , अच्छा करोगे , जीवन में सब अच्छा -अच्छा होगा ------ बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
No comments:
Post a Comment