भगवान् को छल कपट बिलकुल भी पसंद नहीं है :- भगवान् , सदगुरु , अच्छा संत, महात्मा , पीर , फ़क़ीर , ज्ञानी , यहाँ तक कि सज्जन व्यकित भी - अमीर हो या गरीब उसे भी छल कपट बिलकुल पसंद नहीं होता है , रामायण में सुंदर कांड में भगवान् ने एक चौपाई में कहा है ----निर्मल मन जन सो मोहि पावा , मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। भगवान् कहते है जिसका मन छल कपट से रहित है , सत्यता और कर्मठता से परिपूरण है , वही व्यक्ति हमारा है या हो सकता है , हमें किसी प्रकार का छल या कपट पसंद नहीं है , व्यक्ति चाहे धार्मिक प्रवत्ति हो या तो व्यापारिक , ----उदहारण के तौर पर आज भी चाय या समोसा की दुकान उसी की चलती है जो बिना छल कपट के अच्छा सामान देता है , अच्छा व्यबहार करता है , लोग खड़े खड़े खाते है , पीते है , कुर्सी और मेज की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है , और जहाँ छल कपट है वहां लाखो का फर्नीचर होते हुए भी लोग नहीं जाते है , रावण ने राम से छल कपट करके सोने का हिरन भेजा , तो प्रति उत्तर में भगवान् ने भी नकली सीता बनाकर लंका में भेज दिया , परिणाम सब ने पढ़ा -जाना , --- इसलिए अपने दिल में सत्यता लाओ , छल कपट से दूर रहो , प्रपंच को मन में न लाओ , सत्यता से अपने काम में लगे रहो , फिर तुम देखोगे कुछ समय बाद जीवन में वह सब कुछ मिलेगा , जिसकी तुमने स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी , जीवन में आगे बढ़ो और सुखी रहो ---- बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
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