भगवान् शंकर का परिवार हमें क्या सिखाता हें :- भगवान् शंकर के परिवार के सदस्यों में कई प्रकार की भिन्नताए हें , जैसे स्वरुप में भिन्नता , वाहन में भिन्नता , परिवेश में भिन्नता , भोजन में भिन्नता , अर्थात किसी की नाक बड़ी हे , किसी के दांत बड़े हें , कोई 6 मुख वाला हें , कोई 1 मुख वाला हें , किसी का वाहन बैल हे , किसी का मोर , किसी का शेर या चूहा , कोई बिना वस्त्र के रहता हे और कोई वस्त्रो से युक्त हे किसी को लड्डू , किसी को मीठा , किसी को भांग धतूरा प्रिये हे , मोर सांप को खा जाता हे , शेर से बैल डरता हे , सांप चूहे को खा जाता हे , कोई पर्वत में बर्फ की शिलाओं में रहेता हे , कोई जंगल में और कोई भवन में रहना चाहता हे ---- उपरोक्त कहानी से तात्पर्य हे कि सोच में , विचार में , चिंतन में, खान पान में , भ्रमण में , जीवन के उद्देश्य में , व्यवहार में , रहन -सहन में , सभी में पूर्णतया भिन्नता हें , फिर भी सब साथ रहते हे , इसी का नाम परिवार हे , हम लोग भी इसी तरह परिवार के हर सदस्य की भावनाओ और विचार का सम्मान करते हुए परिवार के साथ चले और सुखी रहे ------- बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
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