पानी की बूँद का स्वभाव सबमे मिल जाना या गिर जाना होता है : - पानी की बूँद जब धरती पर गिरती हे तो मिट्टी में मिल जाती हे जब यह बूँद गन्दी नाली में गिरती हे तो नाले का पानी बन जाती हे , जब यही बूँद शराब में गिरती हे तो नशीली बन जाती हे , जब ये बूँद जहर में मिलती तो जहर बन जाती हें , जब यह बूँद गर्म तवे पर गिरती हे तो जल जाती हे , और जब यही बूँद भगवान के चरनामृत में पड़ती हें तो अमृत बन जाती हे और जब यही बूँद शुद्ध जल में पड़ती हें के तो प्यासे की प्यास भुजाती हे और जब येही बूँद किसी सीप के मुह में पड़ती हे तो मोती बन जाती हे -- हे मानव -- पानी की बूँद की तरह ही मनुष्य का स्वभाव मिलना और गिरना ही होता हे तो जब गिरना ही हें तो क्यों न शुद्ध जल में गिरे , चरणमृत में गिरे या सीप के मुख में गिरे और मोती बन जाये अर्थात जीवन में ऐसा बढ़ो कि तुम सबसे ज्यादा उपयोगी सम्मानित और उच्च बनकर सबको सुख देते हुए जीवन का लक्ष्य प्राप्त करो --- बाबा की ओर से आशीर्वाद - सदा सुखी रहो ------तात्या साई महाराज तात्या साई मंदिर तातियागंज कानपुर उत्तर - प्रदेश भारत
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